एक साल हो गया बोध ग्राम यात्रा को ... इसके बाद खास शहर के खास इंस्ट। में खास शिक्षा का अनुभव भी प्राप्त हुआ...
ऐसा क्या है जो बोध प्रयोग को ख़ास बनता है! मुझे लगता है की उनका हर प्रोसेस को लेख डालना । इस से शिक्षण प्रक्रिया को समझाने में सहायता मिलती है और यदि कहीं कोई छूट रह गयी हो तो उसे पकड़ने में आसानी रहती है!
ईमानदारी से छात्रों की सीख को सीखने का अवसर भी मिलता है । पूरे प्रोसेस को लिपिबद्ध करेने से एक वैज्ञानिक समझ बनती है जो की प्रचलित सिद्धांतों को जमीन से जुडे अनुभवों की डोर थमाती है ! ऐसा भी लगता है की कुछ नई प्रक्रियाएं भी उजागर हो जायें !
Showing posts with label सीखने की सीख. Show all posts
Showing posts with label सीखने की सीख. Show all posts
Monday, 13 April 2009
Subscribe to:
Comments (Atom)